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222 खरब किलोमीटर दूर है ये ग्रह! वैज्ञानिक इसपर इंसानो को बसाना चाहते हैं!

Exoplanets In Hindi

Exoplanets In Hindi  – पृथ्वी से 23.6 लाइट ईयर दूर एक और ऐसा ग्रह है जो भविष्य में हम इंसानो के लिए नया घर बन सकता है। Gliese 667Cc नाम से जाने जाना वाला ये Exoplanet (सौर मंडल के बाहर का ग्रह)  अपने लाल बौने तारे ग्लीस Gliese 667C की परिक्रमा करता है जो कि Gliese 667 स्टार सिस्टम का हिस्सा है। इस ऐक्सोप्लेनेट को Super Earth भी कहते हैं क्योंकि आकार और वजन में यह पृथ्वी से काफी बड़ा है।

अगर इसके वजन (Mass) की बात करें तो ये पृथ्वी से लगभग 4 गुना भारी है और इसका रेडियस पृथ्वी से देढ़ गुना ज्यादा है। अगर आप इस ग्रह पर उतरते हैं तो आपको इसकी Surface Gravity के कारण अपने आप पर 1.5 गुना ज्यादा भार महसूस होगा और साथ में यहां आपको चट्टानें और बर्फ भी मिल सकती है।

ये Exoplanet अपने तारे Gliese 667C से 1 करोड़ 87 लाख किलोमीटर दूर है जो कि पृथ्वी और सूर्य की दूरी के हिसाब से काफी पास में है, इस कारण ये अपने तारे की 90 प्रतिशत लाइट लेता है , पर Gliese 667C तारा एक रेड ड्वार्फ स्टार (बौना तारा)  है और इसकी सतह का तापमान 3400 डिग्री सेल्सियस है जबकि हमारे सूर्य का तापमान 5500 डिग्री सेल्सियस होता है।

ये तारा सूर्य से काफी ठंडा है जिस कारण ये ग्रह इतना नजदीक होकर भी एक अच्छा तापमान मैंटेन करके रखता है जो कि करीब 4 डिग्री से लेकर 30 डिग्री सेल्सियस तक हो सकता है। वैज्ञानिक मानते हैं कि ग्लीस 667 सी तारा हमारे सूर्य से 10-15 गुना ज्यादा जिंदा रहेगा जिस काऱण इसके ग्रह का भी जीवन काल बहुत लंबा होगा। ऐसे में वैज्ञानिक मानते हैं कि भविष्य में यह ग्रह हमारे लिए जीवन का स्रोत हो सकता है।

पर फिलहाल प्राप्त डेटा से वैज्ञानिक ये भी मानते हैं  कि शायद ये ग्रह अपने होस्ट स्टार से इतने नजदीक होने के कारण कहीं Tidally locked ना हो नहीं तो फिर एक साइड हमेशा स्टार की तरफ रहेगी और एक हमेशा अंधकार की तरफ और ऐसे में जीवन केवल उसी जगह पनप सकेगा जहां पर ये दोनों साइड्स मिलती हों यानि की टरमिनेटर लाइन पर क्योंकि ऐसे में वही एकमात्र जगह होगी जहां पर तापमान और वातावरण जीवन के लिए ठीकठाक होगा।

पर परेशानी ये नहीं है कि ये तारे पर जीवन होगा या नहीं उससे बड़ी परेशानी तो उस पर पहुँचने की है एक तो यह ऐक्सोपलेने यानि ग्रह हमसे 23.6 लाइट ईयर यानि की 217 लाख करोड़ किलोमीटर है तो दूसरा हमारे पास कोई भी तकनीक नहीं है जिससे हम कम समय में भी इस ग्रह पर पहुँच सके…अगर हम वायेजर 1 की स्पीड से जायें जो कि 17 किलोमीटर पर सेकेंड है तो हमें इस पर पहुँचने में करीब 4 लाख साल लगेंगे जिसका कोई तुक नहीं बनता है,  वैसे भी ये ग्रह इतना दूर है कि लाइट की स्पीड से भी 24 साल लगते हैं तो ऐसे में हम इस ग्रह पर जाने की केवल भविष्य में ही सोच सकते हैं…..

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Shivam Sharma

शिवम शर्मा विज्ञानम् के मुख्य लेखक हैं, इन्हें विज्ञान और शास्त्रो में बहुत रुचि है। इनका मुख्य योगदान अंतरिक्ष विज्ञान और भौतिक विज्ञान में है। साथ में यह तकनीक और गैजेट्स पर भी काम करते हैं।

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