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ISRO के Gaganyaan (गगनयान) प्रोग्राम को मंजूरी, 3 भारतीय अंतरिक्ष में गुजारेंगे 7 दिन

Gaganyaan Mission Hindi

Gaganyaan Mission Hindi  – भारतीय अंतरिक्ष ऐजेंसी इसरो ने अपने नये मिशन के लिए तीन अंतरिक्ष यात्रियों को चुना है जो कि गगनयान प्रोग्राम के तहत अंतरिक्ष में जाकर के सात दिन गुजारेंगे। यह भारत के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है, जिसके लिए केंद्र सरकार ने 10 हजार करोड़ का बजट तय किया है। आफको बता दें कि अगर भारत इस मिशन को सफलतापूर्वक कर लेता है तो वह अंतरिक्ष में मानव मिशन करने वाला चौथा देश बन जायेगा, इससे पहले अमेरिका, रूस और चीन अंतरिक्ष मानव मिशन को सफतलापूर्वक कर चुके हैं।

Gaganyaan mission को ISRO ने अगस्त में देश के सामने रखा था, जिसे शुक्रवार को मीडिया को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि इस परियोजना में 10,000 करोड़ रुपये की लागत आएगी। पीएम नरेंद्र मोदी ने इस साल स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अपनी स्पीच में गगनयान प्रॉजेक्ट का ऐलान किया था। पीएम मोदी ने कहा कि था यह मिशन 2022 तक पूरा होगा। इस महत्वाकांक्षी प्रॉजेक्ट में मदद के लिए भारत ने पहले ही रूस और फ्रांस के साथ करार कर लिया है।

कैप्सुल का हो चुका है परीक्षण 

गौरतलब है कि पिछले दिनों इसरो ने एक क्र एस्केप मॉड्युल यानी कैप्सुल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया, जिसे अंतरिक्ष यात्री अपने साथ ले जा सकेंगे। दरअसल, अंतरिक्ष यात्री दुर्घटना की स्थिति में कैप्सुल में सवार होकर पृथ्वी की कक्षा में सुरक्षित पहुंच सकते हैं। इसरो ने इस मॉड्यूल का विकास खुद अपने दम पर किया है।

टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) ने कुछ दिन पहले ही रिपोर्ट छापी थी कि गगनयान के यात्रियों के चुनाव के लिए इसरो ने काम शुरू कर दिया है। इसके लिए इसरो लोगों के मेडिकल चेकअप के साथ-साथ उनके साथ कुछ माइक्रो-बायोलॉजिकल प्रयोग कर रहा है। बता दें कि अंतरिक्ष में जाने से पहले हर व्यक्ति को कई चरणों में टेस्ट पास करने होते हैं।

2020 में एक छोटा मानवरहित मिशन

गगनयान (Gaganyaan) के लिए भी इसरो एक व्यक्ति का कम से कम 10 टेस्ट करेगा। इसरो के एक अधिकारी ने कहा, ‘वैसे तो हमने 10 पैमाने तय किए हैं लेकिन अगर जरूरत पड़ती है तो हम और टेस्ट करेंगे।’ इसरो चीफ के सिवन भी कह चुके हैं कि 2022 तक गगनयान भेजा जा सकेगा। इससे पहले इसरो 2020 और 2021 में दो मानवरहित मिशन भेजेगा।

1984 के बाद कोई दूसरा भारतीय जायेगा अंतरिक्ष में

अबतक केवल राकेश शर्मा ही एकमात्र भारतीय हैं जो अंतरिक्ष में जा युके हैं, वे 1984 में सोवियत संघ की मदद से अंतरिक्ष में भेजे गये थे। अगर यह मिशन सफल रहा तो ये भारतीयों के लिए बहुत गर्व  का विषय होगा जिससे भारत की दुनिया में और शान बढ़ जायेगी। इस मिशन को इस तहत भी देखा जा रहा है कि इससे छात्रो और लोगों में विज्ञान के प्रति काफी रुचि बढ़ेगी और ये भारत के लिए तकनीक और विज्ञान की दिशा में एक बहुत सफल कदम होगा।

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Shivam Sharma

शिवम शर्मा विज्ञानम् के मुख्य लेखक हैं, इन्हें विज्ञान और शास्त्रो में बहुत रुचि है। इनका मुख्य योगदान अंतरिक्ष विज्ञान और भौतिक विज्ञान में है। साथ में यह तकनीक और गैजेट्स पर भी काम करते हैं।

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