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जानें क्या है प्राकृतिक आपदाएं और कैसे निपटें इनसे

सर्वप्रथम इस विषय पर चर्चा करने से पहले ज़रूरी है की हम इसकी मूल परिभाषा को जानें , तभी हम इस विषय की गहराई को समझ सकते हैं | तो आइये इसे परिभाषित करने का प्रयत्न करते हैं :-

कोई भी ऐसी परिस्थिति जिससे प्रकृति में कुछ ऐसी बाधाएं उत्पन्न हो जिससे जान माल का भारी नुक्सान हो जाए , प्राकृतिक आपदा कहलाती है |

प्राकृतिक आपदाओं की वजह से भारत में हर साल हजारों लोग मारे जाते हैं। प्राकृतिक आपदाओं के बाद फैलनेवाली महामारी के कारण भी हजारों लोग मर जाते हैं।

इन घटनाओं के कारण हो रहे इतने बड़े पैमाने पर विनाशके बावजूद देश में एक प्रभावी आपदा प्रबंधन प्रणाली का अभाव है।

भूकंप, भूस्खलन, सूखा, बाढ़, सुनामी और चक्रवात आदि व्यापक प्राकृतिक आपदाओं के प्रमुख उदाहरण हैं। जहां तक भूकंप का सवाल है हिमालय, उप-हिमालयी क्षेत्रों, कच्छ और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह भारत में
भूकंपीय दृष्टी से कमजोर क्षेत्रों में गिने जाते हैं।

भूकंप पृथ्वी के क्रस्ट में विशाल चट्टानों के रूप में मौजूद विवर्तनिक प्लेटों के बीच आंतरिक दबाव में वृद्धि के कारण होता है जिसकी वजह से वे टूटने लगते और भूकंप की वजह से जमीन हिलने लगती है। यदि भूकंप की तीव्रता अधिक होती है तो यह इमारतों, घरों, पुलों आदि को तोड़ देती है जिससे जीवन और संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचता है।

वर्षा की मात्रा में कमी होने की वजह से सूखा पड़ जाता है। यह मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है – मौसम विज्ञान से संबंधित, जल विज्ञान एवं कृषि से संबंधित। देश में 16 प्रतिशत क्षेत्र में सूखे का खतरा मंडरा रहा है।

तूफान महासागरों में भूकंप (सुनामी) के कारण आते हैं। सागर में तापमान और दबाव की भिन्नता की वजह से चक्रवात आते हैं। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में, 5 से 6 उष्णकटिबंधीय चक्रवात प्रत्येक वर्ष आते हैं। पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु में बंगाल की खाड़ी के पूर्व स्थित तट एवं गुजरात और महाराष्ट्र अरब सागर के पश्चिम तट उच्च क्षमता वाले चक्रवात और सुनामी के लिए जाने जाते हैं।

 कैसे निपटें प्राकृतिक आपदाओं से :-

वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति के बावजूद हमें वास्तव में यह पता नहीं चल पाता कि कब एवं कहां कोई प्राकृतिक आपदा आने वाली है। यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है और हम इसे रोक नहीं सकते। लेकिन कुछ तैयारियों के द्वारा इनके प्रभावों को कम किया जा सकता है और साथ ही जीवन एवं संपत्ति के नुकसान को कुछ हद तक कम करने में कामयाबी हासिल की जा सकती है।

आपदा के प्रभाव को कम करने के लिए एक अग्रिम चेतावनी प्रणाली विकसित किए जाने की आवश्यकता है। प्राकृतिक आपदा की स्थिति में लोगों को सुरक्षित निकासी के लिए भी प्रशिक्षित किए जाने की आवश्यकता है।

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Balram Kumar Ray

बलराम कुमार राय विज्ञानम् के गैजेट्स केटेगरी के लेखक हैं. इन्हें टेक्नोलॉजी , गैजेट्स, और Apps पर लिखने में बहुत रूचि है।

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