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Earth Details And Facts In Hindi – पृथ्वी के बारे में रोचक तथ्य और पूरी जानकारी

All About Earth In Hindi

Earth Details And Facts In Hindi  – पृथ्वी (Earth)  हमारे सौर मंडल का सूर्य से दूरी के क्रम में तीसरा ग्रह है। इसे नीला ग्रह भी कहते हैं। पृथ्वी एक मात्र ऐसा ग्रह है जिसपर जीवन मौजूद है, वैज्ञानिकों के मुताबिक सौर मंडल के दूसरे ग्रहों पर जीवन नहीं है। इस अद्भुत ग्रह का जन्म आज से 4.5 अरब वर्ष पहले हुआ था, जिसमें जीवन की शुरुवात को 3.3 अरब वर्ष पहले माना जाता है। सौर मंडल में आठ ग्रहों में पृथ्वी पांचवा सबसे बड़ा ग्रह है।

पृथ्वी हमारा घर भी है जितने भी जीव, जंतु, प्राणी और मनुष्य हम देखते हैं वे सभी इसी घर में रहते हैं। पर ये घर हमेशा से ऐसा नहीं था जैसा आज हम देखते हैं। पृथ्वी के बनने के आरंभ में इस ग्रह पर जबरदस्त टक्करे हुआ करती थी। उन्हीं टक्करों को वैज्ञानिक इस ग्रह पर जीवन और पानी का होना भी मानते हैं। पृथ्वी का जन्म कैसे हुआ और वह 4.5 अरब साल पहले कैसी थी इसके बारे में हम पहले ही आपको बता चुके हैं, इस लेख में हम केवल इस नीले ग्रह पृथ्वी के कुछ अद्भुत तथ्यों की बात करेंगे…

Earth Planet Profile – पृथ्वी की रूपरेखा

 

Equatorial Diameter (भूमध्य व्यास) : 12,756 km
Polar Diameter (पोलर व्यास) : 12,714 km
Mass (द्रव्यमान) : 5.97 x 10^24 kg
Moons (चंद्रमा) : 1 चंद्रमा
Orbit Distance (कक्षा) : 149,598,262 km (1 AU)
Orbit Period (सूर्य का एक चक्कर) : 365.24 दिन
Surface Temperature (सतह का तापमान) : -88 to 58°C
Escape Velocity (पलायन वेग) : 11.186 km/s

Earth Facts In Hindi – पृथ्वी के बारे में रोचक तथ्य 

The Earth’s rotation is gradually slowing – पृथ्वी का घूर्णन धीरे – धीरे कम होता जा रहा है

नासा की मानें तो पृथ्वी का रोटेशन हर 100 सालों में धीमा होता रहता है, जिसका मतलब है हमारे दिन ठीक 24 घंटे के नहीं हैं, पृथवी को एक रोटेशन में वास्तव में 24 घंटे और 2.5 मिलीसेकंड लगते हैं।

देखा जाये तो ये 2.5 मिलीसेंकेड बड़ी बात नहीं लगती है पर धरती अरबों सालों से इसी तरह घूम रही है, जब डायनासोर राज करते थे तब धरती पर एक दिन 23 घंटो का होता था, आने वाले अरबों सालों में पृथ्वी पर एक दिन शायद 25 से 26 घंटो का हो सकता है।

ऐसा ग्रह जिसे बिना स्पेसक्राफ्ट की मदद से जाना गया है 

ज़ाहिर है कि पृथ्वी एकमात्र ऐसा ग्रह है जिसे अंतरिक्ष यान की सहायता के बिना पृथ्वी का अध्ययन किया जा सकता है। फिर भी बीसवीं सदी तक पूरे ग्रह के नक्शे नही थे। अंतरिक्ष से ली गई है ग्रह की तस्वीरें काफी महत्व की हैं और वे असाधारण रूप से सुंदर हैं। अंतरिक्ष उपग्रहमौसम की भविष्यवाणी में एक विशाल मदद कर रहे हैं साथ ही  विशेष रूप से ट्रैकिंग और तूफान की भविष्यवाणी करने में। आपको बता दूँ कि अब तक हम इंसानो ने सौर-मंडल के सभी ग्रहों पर अंतरिक्ष यान भेज दिये हैं।

पृथ्वी एक बहुत तेज घूमने वाला यान है

हम जानकर चौंक जायेंगे जब मैं यह कहूँगा कि आप एक ऐसे यान में सफर कर रहे हैं जिसकी गति अब तक के बने सबसे तेज यान से भी लाखों गुना ज्यादा है। आपको भले ही लगे की आप तो आराम से चेयर पर बैठे हैं पर वास्तव में हमारी पृथ्वी एक यान की तरह ही है ब्रह्मांण्ड में चक्कर काटती है। इसकी गति 21 लाख किलोमीटर प्रति घंटे  के बराबर है।

पृथ्वी की पहली फोटो!

ये तो आप जानते ही हैं कि अंतरिक्ष की रेस 1957 में रूस ने शुरू की थी। सबसे पहले 1957 में सोवियत संघ (रूस) ने  Sputnik यान अंतरिक्ष में भेजा था जिसने अंतरिक्ष से पृथ्वी की कुछ फोटो ली थीं। पर उससे भी पहले October 24, 1946  में अमेरिका के यान V-2 rocket (No. 13) ने New Mexico के आर्मी कैंप से उड़ान भर के पृथ्वी की अंतरिक्ष से पहली फोटो ली थी। जिसे आप नीचे तस्वीर में देख सकते हैं –

पृथ्वी की सबसे पहली फोटो – सोर्स – नासा

पृथ्वी की सबसे दूर से ली गई फोटो – The Pale Blue Dot

वायेजर मिशन के तहत 1977 में वायेजर यान अंतरिक्ष की यात्रा के लिए भेजे गये थे, जो अब सौर मंडल की सीमा को पार करके Interstellar Journey (तारों की यात्रा)  पर निकल चुके हैं। उन्हीं यानों में से एक वायेजर 1 ने 1990 में शनि ग्रह के पास से पृथ्वी की ये तस्वीर ली थी। ये एकमात्र पृथ्वी की  फोटो है जो 6 अरब किलोमीटर से ली गई है। इस फोटो में पृथ्वी सूर्य की एक किरण में छोटे से नीले कण की तरह दिखाई दे रही है। इस फोटो को सबसे ज्यादा अंतरिक्ष विज्ञानी कार्ल सगन को प्रभावित किया जिन्होंने इस ऐतेहासिक फोटो को Pale Blue Dot का नाम दिया।

Pale blue dot – सोर्स नासा

पृथ्वी का चांद उसका एकमात्र उपग्रह है

सौर मंडल में ग्रहों के उपग्रह होते हैं जो ग्रहों की परिक्रमा करते हैं। ये उपग्रह इन ग्रहों पर जीवन, दिन-रात और ग्रेविटी को प्रभावित करते हैं। हमारी पृथ्वी का चांद उसका उपग्रह है जो आकार में बहुत बड़ा है।

ये सौर मंडल के सभी खोजे गये चंद्रमाओं में पांचवा सबसे विशाल चंद्रमा है। जिसका व्यास 3,475 km है। सौर मंडल में शनि और बृहस्पति ग्रहों के चंद्रमा ढेर सारे हैं।

पृथ्वी के बाहर अंतरिक्ष की गंध कैसी है?

जब आप अंतरिक्ष के बारे में सोचते हैं तो सबसे पहले यही ख्याल आता है कि अंतरिक्ष दिखता कैसा है, महसूस कैसा होता है और इसमें क्या सुनाई देता है? पर कभी आपने इस पर ध्यान नहीं दिया होगा कि अंतरिक्ष की गंध कैसी है क्या इसमें खुशबू आती है या बदबू सी लगती है।

स्पेस में कोई भी अंतरिक्ष यात्री अपना स्पसेसूट नहीं उतारता है और ना ही ऐसा करने की कोशिश करता है क्योंकि अगर करता भी है तो वह हमें गंध बताने कि लिए जिंदा ही नहीं रहेगा। हमें अंतरिक्ष की गंध का पता केवल और केवल स्पेस यात्रियों के सूट और उनके औजारों से ही पता चलता है, जब उनकी जाँच की जाती है तो तभी उनमें से आनी वाली गंध का बताया जाता है।

Max Planck Institute के वैज्ञनिकों ने अपनी एक रिसर्च में कहा है कि आकाश गंगा का केंद्र एक Strawberry की तरह महकता है। मतलब की जो खुशबू किसी बैरी में आती है वही हमारी आकाशगंगा के केंद्र से आती है। इसके पीछे तर्क ये है कि आकाशगंगा के केंद्र में इथाइल फोरमेंट बनती है जो खुद इन मीठी बैरीस में पाई जाती है।

क्या हमारी पृथ्वी भी ब्लैक होल बन सकती है – Earth as a black hole

ब्लैक होल हमेशा उन विशालकाय तारों से बनते हैं जो अपनी उर्जा खत्म करने के बाद अपनी ही ग्रेविटी के कारण Collapse हो जाते हैं और Supernova विस्फोट करने के बाद वे ब्रह्माण़् की सबसे अजीब चीज़ ब्लैक होल में बदल जाते हैं।

ब्लैक होल बनने के लिए किसी भी तारे को हमारे सूर्य से कमसेकम  10 गुना ज्यादा द्रव्यमान होना चाहिए नहीं तो वह कभी भी ब्लैक होल नहीं बन सकता है। हमारा सन कभी भी ब्लैक होल नहीं बन सकता है फिर हमारी पृथ्वी की गिनती ही क्या है.

पर अगर आप पृथ्वी को फिर भी ब्लैक होल बनना चाहते हैं तो इसके लिए आपको इसे तबतक दबाना पड़ेगा जबतक ये किसी छोटे से कंचे जितनी ना हो जाये, पर ऐसा करना प्रैक्टली असंभव है।

ब्रहमांड का सबसे कम तापमान पृथ्वी की एक लैव में  – Absolute Zero

ब्रहमांड का सबसे कम तापमान -273.15 डिग्री सेल्सियस है इसे हम ब्रह्मांड का सबसे कम तापमान कहते हैं वैज्ञानिकों की माने तो ब्र्हमांड में इससे कम टेमपरेचर नहीं हो सकता है। इसे Absolute Zero भी कहते हैं।

साल 2003 में MIT के शोधकर्ताओं ने एक लेबोरेटरी में यह तापमान हासिल किया था जिसका मतलब था की यूनिवर्स में अगर कोई सबसे ठंडी जगह हो सकती है तो उसका टेम्परेचर absolute zero ही होगा। साइंटिस्ट ने यह टेम्परेचर पृथ्वी पर ही हासिल कर लिया था। हेरानी की बात तो ये है की इतने कम टेम्परेचर – 273.15 डिग्री सेल्सियस में भी एक खास तरह का सुक्ष्म जीव जिन्दा बना रहता हैं, पानी में जिंदा रहने वाला ये जीव एकदम अमर ही है इसे टार्डिग्रेड नाम से जाना जाता है ये शायद ऐसा जीव है जो कहीं भी जिंदा रह सकता है।

सूर्य के तूफान से हमारी रक्षा करता है पृथ्वी का magnetosphere 

सूर्य से निकलने वाली सोलर बिंड या सौर हवा जिसमें अरबों खरबों ऐटोमिक पार्टिकल्स होते हैं जब वह पृथ्वी से टकराती है तो वह पृथ्वी के magnetosphere को प्रभावित करती है, magnetosphere पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र है जो पृथ्वी की सौर कणों से रक्षा करता है।

Earth’s magnetosphere. Source – NASA

साल 1859 में एक बहुत विशाल सौर तुफान पृथ्वी से टकराया था, इस तुफान को कैरिंगटन इवेंट कहते हैं जिसमें सूर्य से निकलने वाली एक विशाल सौर हवा ने पृथवी के मैगनेटिक नेचर को बहुत हद तक गढ़बड़ कर दिया था।

सोचिए, इस तरह का कोई तुफान आज के समय में पृथ्वी से टकराये तो क्या होगा?? भले ही ये हम इंसानो को खत्म करने की ताकत ना रखता हो पर अरबों कणों की यह आंधी हर सैटलाइट और गैजेट्स को तुरंत खराब कर देगी। आपके सभी संपर्क इस दुनिया से कट जायेंगे।ये इस कदर होगा कि सैटेलाइट और तमाम उपरकरण जल भी सकते हैं और कई सालों तक खराब भी रहेंगे।

एक दिन सूर्य पृथ्वी को खत्म कर देगा

वैज्ञानिकों को सूर्य की उम्र को लेकर कई मतभेद हैं कोई इसे कुछ अरब सालों का मानता है तो कुछ के लिए इसे खत्म होने में 10 अरब साल से भी ज्यादा लग सकते हैं। पर इन सबसे बीच सवाल ये है कि हमारा ग्रह कैसे रहेगा क्या ये भी सूर्य के साथ – साथ खत्म हो जायेगा? तो वैज्ञानिक इस सावल का जवाब सीधे तरीके से देने में बचते हैं, कुछ का मानना है कि जैसे –जैसे सूर्य उर्जा खत्म करके एक बढ़ेगा और रेड जाईंट में बदलेगा तो उसी के साथ वह अपने आकार को भी फैला लेगा, उसका आकार इतना फैल सकता है कि शायद पृथ्वी भी इसमें समा जाये। अगर ऐसा होता है तो फिर पृथ्वी का नामोनिशान ही नहीं रहेगा।

कुछ वैज्ञानिक ये भी मानते हैं कि जैसे – जैसे सूर्य उर्जा खत्म करेगा और अपने MASS को भी थोड़ा खो देगा तो शायद ये पृथ्वी उसके गुरुत्व से बाहर हो जायेगी और भटकने लगेगी, पर इन दोनों ही अवस्था में पृथ्वी का तो कोई निशान ही नहीं रहेगा। पर हम और वैज्ञानिक इस तथ्य के सामने कुछ नहीं कर सकते हैं क्योंकि ये तो होना ही है औऱ वैसे भी ये  10 अरब सालों के बाद ही होगा तबतक तो शायद हम इंसानो का ही अस्तित्व खत्म हो जाये। ये तो कोई नहीं जानता है कि अगर हम कभी पृथ्वी से बहार निकलकर किसी दूसरे ग्रह और सौर मंडल में रहने भी लगे तो भी इस घटना को कौन देखेगा…… 10 अरब साल तो हमारी कल्पना से भी परे हैं…. पर ब्रह्मांड के लिए ये भी मात्र सेकेंड्स के बराबर ही हैं….

Some More Facts About Earth – पृथ्वी के कुछ और मजेदार तथ्य 

  1. Earth पर उपस्थित 70% पानी का 97% पानी खारा है इसका मतलब ये की सिर्फ 3% पानी ही पीने के योग्य है!
  2. इस 3% पानी का 2% से अधिक बर्फ की परतों तथा ग्लेशियरों में रहता है, जिसका अर्थ है 1% से भी कम पानी झीलों और नदियों में है।
  3. पृथ्वी के अधिकतर भू-भाग पर पानी होने की वजह से सूर्य की किरणों को प्रतिबिंबित करता है इसी कारन दूर से देखने पर पर पृथ्वी प्रतिभाशाली (brightest planets) दिखता हैं।
  4. . पृथ्वी तीन अलग अलग परतों से मिलकर बनी हुई है:- पपड़ी (The Crust) , मेंटल (The Mantle) और कोर(The Core). ये तीनों परतें विभिन्न विभिन्न तत्वों से मिलकर बने हुए हैं।
  5. पृथ्वी का तल भूवैज्ञानिक समय काल के दौरान प्लेट टेक्टोनिक्स और क्षरण की वजह से लगातार परिवर्तित होता रहता है। प्लेट टेक्टोनिक्स की वजह से तल पर हुए बदलाव पर मौसम, वर्षा, ऊष्मीय चक्र और रासायनिक परिवर्तनों का असर पड़ता है। हिमीकरण, तटीय क्षरण, प्रवाल भित्तियों का निर्माण और बड़े उल्का पिंडों के पृथ्वी पर गिरने जैसे कारकों की वजह से भी पृथ्वी के तल पर परिवर्तन होते हैं।
  6. दुनिया में 40% मौते पृथ्वी के प्रदुषण के कारण होती है दुनिया में करीब हर साल 70 लाख लोगो की मौत सिर्फ प्रदुषण के कारण होती है।
  7. अगर चंद्रमा पृथ्वी का उपग्रह नहीं होता तो पृथ्वी पर करीब एक दिन 30 घंटो का होता।
  8. सूर्य इतना बड़ा है कि इसमें करीब 13 लाख पृथ्वी समा सकती है और वजन यानि की द्रव्यमान के अनुसार तो वह 3 लाख 40 हजार गुना ज्यादा भारी है।
  9. पृथ्वी की परिक्रमा करने वाला और अंतरिक्ष में वैज्ञानिकों का घर ISS (International Space Station) अबतक का बना सबसे मंहगी कोई भी यान या कहें मशीन है इसकी कीमत 210 विलियन डॅाल में है।
  10. धरती की कोर (अंदरूनी सतह) में इतना सोना मौजूद है की धरती की पूरी सतह को सोने से ढक सकते है।
– Solar System Hindi Facts And Details –  सौर मंडल के बारे में पूरी जानकरी
– आखिर कितना बड़ा है ब्रह्मांड, और कितना हम इसे देख सकते हैं?

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Shivam Sharma

शिवम शर्मा विज्ञानम् के मुख्य लेखक हैं, इन्हें विज्ञान और शास्त्रो में बहुत रुचि है। इनका मुख्य योगदान अंतरिक्ष विज्ञान और भौतिक विज्ञान में है। साथ में यह तकनीक और गैजेट्स पर भी काम करते हैं।

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