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ये है सौर मंडल का ऐसा ग्रह जहां पर होती है हीरों की बारिश

Diamond Rain On Neptune

Diamond Rain On Neptune –  हमारा ब्रह्मांड किसी रहस्य से कम नहीं है, आप जितना भी इसके अंदर जाने की कोशिश करेंगे उतना ही उलझते जायेंगे, इस विशाल ब्रह्मांड में हम सोच भी नहीं सकते हैं कि रहस्यों की भी कोई सीमा हो सकती है।

हमारा सौर मंडल जो खुद सूर्य की सीमा में बंधा हुआ है वह खुद अपने अंदर इतने रहस्य समेटे हुए है कि उन्हें समझने में ही हमे कई वर्ष लग सकते हैं।

सौर-मंडल या Solar System साढे 4 अरब साल पुराना है, ये सूर्य की सीमा को दर्शाता है अगर हम सच में देखें तो ये हमारी सोच से ही बहुत बड़ा है, इसमें आठ ग्रह और पाँच बौने-ग्रह शामिल हैं। आज जितनी भी रिसर्च और खोजें हमने ब्रह्मांड के बारे में की हैं, उससे कहीं कम हमें अपने सौर-मंडल के बारे में पता है।

एक ऐसी ही बेहद विचित्र और चौकानें देने वाली बात वैज्ञानिकों को कुछ दशक पहले पता लगी थी, वैज्ञानिकों ने जब सौर मंडल के आखिरी ग्रह का अध्ययन किया तो पाया कि ये ग्रह सूर्य से आनी वाली उर्जा या कहें हीट को दोगुना करके अंतरिक्ष में छोड़ देता है। ये ग्रह सूर्य से बहुत दूर है ऐसे में इसे ठंडा होना चाहिए पर वास्तव में ये जितना ठंडा होना चाहिए उतना है नहीं। आखिर इसके पीछे की वजह क्या है और क्यों वैज्ञानिक यहां पर हीरों की बारिश की बात को सच मानते हैं –

आज से 12 साल पहले प्लूटो को ग्रह माना जाता था, वह सौर मंडल का सबसे ठंडा ग्रह भी है, पर प्लूटो के उपग्रह बनने के बाद अब सौर-मडल का सबसे ठंड़ा ग्रह नेप्टून (Neptune)   है। यह ग्रह सूर्ये से करीब 4.5 अरब Kilometer दूर है। इसकी इतनी दूरी इसे सबसे ठंड़ा ग्रह बनाती है पर वास्तव में इसे जितना ठंडा होना चाहिए ये उतना ठंडा नहीं है।

Neptune Source – NASA

– Planet Neptune Facts In Hindi – नेपच्यून ग्रह के बारे में रोचक फैक्ट्स

इस ग्रह की सतह तापमान -200 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा नहीं बढ़ता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक इसका वास्तविक तापमान Absolute Zero यानि की -273 डिग्री सेल्सियस तक होना चाहिए पर ये उससे कहीं ज्यादा गर्म ही है। इसके इस विचित्र तापमान के लिए वैज्ञानिक इश ग्रह पर हीरों की वारिष को जिम्मेदार मानते हैं।

इसी हीरों की वारिष की वजह से यह ग्रह सूर्य की प्राप्त हीट से दोगूना हीट खुद में से अंतरिक्ष में छोड़ता है। वैज्ञानिक मानते हैं  ऐसा इसलिए होता होगा कि क्योंकिनेप्टून  पर भारी मात्रा में मिथेन (Methane) है जो कि इसके वायुमंडल के दबाव यानि की Atmospheric Pressure के कारण वातावरण में हीरे में बदल जाता होगा।

यही हीरा फिर बादलो के रूप में आकार के इस ग्रह पर बरसता है और इसी बरसने के कारण से हीरे में गजब का फ्रिक्सन होता है जिससे काफी उर्जा निकलती है। वैज्ञानिक इसी थ्योरी को नेप्टुन के इस आसामान्य तापमान और उर्जा या हीट के जरूरत से ज्यादा अंतरिक्ष में छोड़ने का कारण मानते हैं।

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Shivam Sharma

शिवम शर्मा विज्ञानम् के मुख्य लेखक हैं, इन्हें विज्ञान और शास्त्रो में बहुत रुचि है। इनका मुख्य योगदान अंतरिक्ष विज्ञान और भौतिक विज्ञान में है। साथ में यह तकनीक और गैजेट्स पर भी काम करते हैं।

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