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अटल बिहारी वाजपेयी जी के यह प्रेरणादायक विचार आपके जीवन को बदल देंगे

अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) भारत के पूर्व प्रधानमंत्री थे जिन्होंने तीन बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। उदार, लोगों के प्रति स्नेह रखने वाले महान नेता थे वाजपेयी। नेता के साथ वह एक महान कवि भी थे, उनकी कवितायें सीधे दिल को छू जाती थीं। प्रेरणा से भरे उनके विचार युवाओं में जोश भर देते थे।

अटल बिहारी वाजपेयी जी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर मध्य प्रदेश में हुआ था, अटल जी का राजनैतिक दल भारतीय जनता पार्टी दाल रहा है. 16 मई 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी जी पहली बार भारत के 11वें प्रधानमंत्री बने. इसके बाद 19 मार्च 1998 से लेकर 22 मई 2004 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे।

इस दौरान उन्होंने देश के लिए कई ऐतिहासिक फैसले लिए जिनके लिए आज भी उन्हें याद किया जाता है। वाजपेयी जी लंबे समय से बीमार चल रहे थे, जिस कारण उनका शरीर रोज रोज शिथिल पड़ता जा रहा था। पिछले 2 महीनों से उनका इलाज AIIMS में चल रहा था, पर आज शाम को 5 बजकर 05 मिनट पर वे जिंदगी की जंग को हार गये। वाजपेयी जी ने 93 साल की उम्र में अंतिम सांस ली।

अटल जी के विचार इतने प्रेरणादायक हैं जिन्हें पढ़ने के बाद आपको एक सुकून भरा एहसास जरुर होगा और आपको अपने जीवन में कुछ कर गुजरने की शक्ति प्रदान होगी…

अटल बिहारी वाजपेयी जी के प्रेरणादायक विचार

1. सूर्य एक सत्य है, जिसे झुठलाया नहीं जा सकता। मगर ओस भी तो एक सच्चाई है, यह बात अलग है कि  क्षणिक है।

2. जलना होगा, गलना होगा।
कदम मिलाकर चलना होगा।

3. पेड़ के ऊपर चढ़ा आदमी; ऊंचा दिखाई देता है। जड़ में खड़ा आदमी, नीचा दिखाई देता है। न
आदमी ऊंचा होता है, न नीचा होता है; न बड़ा होता है, ना छोटा होता है। आदमी सिर्फ आदमी होता है।

4. हराम में भी राम होता है।

5. किसी संत कवि ने कहा है कि मनुष्य के ऊपर कोई नहीं होता; मुझे लगता है कि मनुष्य के ऊपर उसका मन होता है।

6. मैं अटल हूं…..
मैं बिहारी भी हूं।

7. छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता,
टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता।

8. पड़ोसी कहते हैं कि एक हाथ से ताली नहीं बजती, हमने कहा की चुटकी तो बज सकती है।

9. मन हारकर मैदान नहीं जीते जाते; न मैदान जीतने से मन ही जीते जाते हैं।

10. आपका मित्र बदल सकता है लेकिन पड़ोसी नहीं।

11. आदमी को चाहिए कि वह  परिस्थितियों से लड़े; एक स्वप्न टूटे तो दूसरा गढ़े।

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12. मनुष्य का जीवन अनमोल निधि है। पुण्य का प्रसाद है। हम केवल अपने लिए न जिएं, औरों के लिए भी जिए ।जीवन जीना एक कला है। एक विज्ञान है दोनों का समन्वय आवश्यक है।

13. आदमी की पहचान उसके धन या आसन से नहीं होती; उसके मन से होती है। मन की फकीरी पर कुबेर की संपदा भी रोती है।

14. कपड़ों की दूधिया सफेदी जैसे मन की मलिनता को नहीं छिपा सकती।

15. जो जितना ऊंचा होता है; उतना ही एकाकी होता है। हर बार को स्वयं ही ढोता है, चेहरे पर मुस्कान चिपका; मन ही मन में रोता है।

16. ऐसी खुशियां जो हमेशा हमारा साथ दें। कभी नहीं थी, कभी नहीं है और कभी नहीं रहेंगी।

17. पृथ्वी पर मनुष्य ही एक ऐसा प्राणी है, जो भीड़ में अकेला और अकेले में भीड़ से घिरे होने का अनुभव करता है।

18. टूट सकते हैं मगर झुक नहीं सकते।

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Pallavi Sharma

पल्लवी शर्मा एक छोटी लेखक हैं जो अंतरिक्ष विज्ञान, सनातन संस्कृति, धर्म, भारत और भी हिन्दी के अनेक विषयों पर लिखतीं हैं। इन्हें अंतरिक्ष विज्ञान और वेदों से बहुत लगाव है।

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