शायद आप नहीं जानते पर अगरबत्ती जलाने से हमारे ऊपर यह प्रभाव पड़ते हैं

भारतीय हिन्दू समाज में हर रीति-रिवाज में अगरबत्ती का बड़ा महत्व है। हर मंदिर और घर में इसका प्रयोग होता है, सुंगध से भरी बत्ती सभी को मोहित कर देती है। अगरबत्ती आप रोज जलाते हैं पर शायद ही आप इसके पीछे का कारण जानते हैं, इसके जलाने के हमारे शरीर और वातावरण में बहुत प्रभाव पड़ते हैं।

आईये जानते है कि अगरबत्ती जलाने का हमारे ऊपर कितना प्रभाव पड़ता हैं।

अगरबत्ती जलाने के पीछे प्राचीन मान्यता

आपने हमेशा देखा होगा कि पूजा करने के बाद अक्सर अगरबत्ती के धुएं को पूरे घर में फैलाया जाता है, इसके पीछे यह मान्यता है कि ऐसा करने से घर का हर कोना पवित्र होता हैं।

एकाग्रता बढ़ाता है

जब हम भगवान की शरण में जाते हैं तो हमे इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहिए कि हम बस भगवान की ही उपासना पर अपना ध्यान लगाए रखें। इसके लिए एकाग्रता की आवश्कता होती है। और एकाग्रता तभी आएगी जब हम अपनी पूजा में अगरबत्ती का प्रयोग करेंगे।

तनाव दूर रहता है

जब हम अगरबत्ती जलाते है तो इसकी खु़शबू से हमारे दिमाग पर हीलिंग और आरामदेह प्रभाव पड़ता है। हम मानसिक तौर पर रिलैक्स हो जाते हैं।

धार्मिक समारोह में क्यों जलाते हैं अगरबत्ती?

जब भी हम किसी धार्मिक समारोह में बैठते हैं तो हम अपनी सारी परेशानी भूल जाते हैं और तनावमुक्त रहते हैं। इसलिए आपने देखा होगा कि हर धार्मिक समारोह में अगरबत्ती जलाई जाती है।

अगरबत्ती जलाने से जागरुकता बढ़ती है

अगरबत्ती जलाने से हमारे मन पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है। इससे हमारी आंतरिक शक्ति बढ़ती है। यह हमें और जागरुक बनाता है।अगरबत्ती की मधुर सुगंध भी इसका कारण है।

अगरबत्ती जलाने के पीछे वैज्ञानिक कारण

अगरबत्ती का धुआं बैक्टीरिया का भी नाश करता है। इसी वजह से अगरबत्ती का प्रयोग अक्सर अस्पतालों में भी होता है। और यह हेल्थ के लिए भी अच्छी मानी जाती हैं। क्योंकि आमतौर पर अगरबत्तियों को प्राकृतिक तौर पर ही बनाया जाता है।

अगरबत्ती जलाना सिर्फ धार्मिक प्रथा का ही हिस्सा नहीं हैं ब्लकि यह कईं दशकों से चीन, इजिप्ट, तिब्बत की प्रथाओं का भी हिस्सा रहा है। वह इसका इस्तमाल धार्मिक समारोह में ही नहीं बल्कि निजी चीज़ जैसे एरोमा थेरेपी में भी करते आ रहे हैं।

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