Poems

” सादगी का गुज़ारा ” – कविता

इशारे अगर बंदगी के सुने हम,

ये जीवन अगर सादगी से जिए हम,

 

न होगी ज़रूरत किसी चीज़ की तब,

निराशाओ के बादल को भी यूँ पियें हम,

 

सादगी का किनारा है मिलता सभी को,

मगर सबका ठहरना, ये मुमकिन नहीं है

 

भले हो भरोसा अगर सादगी पर,

उतारना इसको खुद में, ये फिर भी कठिन है,

 

ज़मीं के, फलक के, जन्नतो से नज़ारे

सादगी से ही निकले, है उससे ही सारे,

 

सादगी की ये हसरत, इन मौसमों  से सीखें ,

बदलते भी है ये मगर सादगी से,

 

बदलना चलन तो है इस ज़िन्दगी का,

बदलावों तले हम इसे भी जगा लें,

 

सोचना और समझना भी हो सादगी से,

ठेस खाकर संभलना भी हो सादगी से I

Balram Kumar Ray

बलराम कुमार राय विज्ञानम् के गैजेट्स केटेगरी के लेखक हैं. इन्हें टेक्नोलॉजी , गैजेट्स, और Apps पर लिखने में बहुत रूचि है।

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