Poems

” यारियाँ ” – कविता

थे जब यूँ नए हम, ज़िन्दगी के भॅवर में,

कुछ अपनी नज़र में, कुछ थमे से पहर में,

 

उन ठहरते पलों में एक किरण जो थी आई ,

उस किरण कि महक कुछ उम्मीदों भरी थी,

 

उम्मीदों तले हमने सोचा बहुत कुछ,

जगाए इरादे दिलों में बहुत कुछ,

 

वो चुनते हुए हम लड़खड़ाए बहुत थे,

सोचने में ही लेकिन हिचकिचाए बहुत थे,

 

फैसलों का वो ज़रिया,  था बहुत खूबसूरत,

पर जो राहें बनी थी, डगमगाए बहुत थे,

 

डगमगाते-संभलते चुनना था वो ज़रिया,

जो लेकर चले हमको उनकी वो गलियाँ,

 

बस बनी कब वो गलियाँ हमारी ज़रूरत,

वो उनका ठहरना, वो मौसम कि दस्तक,

 

वक़्त एक आया, भुला दी ज़रूरत,

यारियाँ ही वो मंज़र, यारियाँ ही वो दस्तक,

यारियों के तले ही, हम चल चुके थे,

यारियाँ ही थी फिदरत, यारियाँ ही इबादत I

Balram Kumar Ray

बलराम कुमार राय विज्ञानम् के गैजेट्स केटेगरी के लेखक हैं. इन्हें टेक्नोलॉजी , गैजेट्स, और Apps पर लिखने में बहुत रूचि है।

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