Poems

कौन हूँ मैं हाँ कौन हूँ मैं ? – कविता

कौन हूँ मैं हाँ कौन हूँ मैं ?

ना ही मैं रंक हूँ ना ही मैं धनवान कुबेर हूँ,
मैं शायद वक़्त का एक अनसुलझा सा फेर हूँ,
या आज अंधेर हूँ तो कल शायद सवेर हूँ |

किस्सा हूँ शायद किसी गुज़रे ज़माने का,
या छलकता हुआ हिस्सा हूँ किसी पैमाने का |

कौन हूँ मैं हाँ कौन हूँ मैं?

दो रिश्तों के बीच की नाज़ुक सी डोर हूँ मैं,
या सुदूर अंतरिक्ष का कोई अंजाना सा छोर हूँ मैं |

वक़्त के घेरे में भटकता हुआ कोई पागल हूँ मैं,
या किसी तूफ़ान में फंसा कोई बदल हूँ मैं |

मुझे लगता है बाकी सबसे अलग हूँ मैं थोड़ा,
क्योंकि भीड़ को छोड़ खुले मैदान की तरफ हूँ मैं दौड़ा |

मुझे अगर उजाले से प्यार है,
तो वहीं मुझे अंधेरों पे भी ऐतबार है |

चाय के पियाले में जो कम रह गई शायद वो मिठास हूँ मैं,
या इस “मैं” के चक्कर में दो दिलों में जो आती है वो खटास हूँ मैं |

अपने से दूर रहते बच्चों की याद में दुखी माँ-बाप का उदास सा चेहरा हूँ मैं,
किसी को भी ना बता सकने की वजह से वो रोज रात डायरी में जो लिखती है शायद वो राज गहरा हूँ मैं |

देर रात काम से थक के घर आए इंसान की थकान हूँ मैं,
या उस इंसान को फिरसे अपने पास देखकर खुश होते उसके बच्चों की मुस्कान हूँ मैं |

कौन हूँ मैं हाँ कौन हूँ मैं?

मैं एक अंश हूँ उस महाभूत के पाँव की धुल का,
या मैं वो कटा हुआ नंबर हूँ इम्तिहान में किसी बच्चे से हुई भूल का|

मैं शायद बारिश की पहली बूँद हूँ,
या खुली वादियों में जो गूंजती हैना मैं वो गूंज हूँ |

गांव सुनसान करके बसाया हुआ एक शहर हूँ मैं,
या झुलसा देने वाली गर्मी की कोई शांत सी दोपहर हूँ मैं |

सुबह नींद पूरी होने के बाद चेहरे पे आने वाली पहली मुस्कराहट हूँ मैं,
या कुछ भी गलत करने पे जोर से चिल्लाती माँ की वो गुर्राहट हूँ मैं |

कौन हूँ मैं हाँ कौन हूँ मैं?

जिसका कोई जवाब नहीं शायद वही सवाल हूँ मैं,
या फिर भूत, भविष्य, कल, आज, आदि, अनंत, अकाल हूँ मैं |

दुनिया के लिए पता नहीं कौन हूँ मैं,
मगर खुद के लिए “महाशम्भु महाकाल” हूँ मैं |

रचियता – अंकित कुमार

Team Vigyanam

Vigyanam Team - विज्ञानम् टीम

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